रिपोर्टर: अमित दीक्षित जिला ब्यूरो चीफ
पीलीभीत। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी की गई UGC गाइडलाइन के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। बुधवार को शहर के प्रमुख नकटा दाना चौराहे पर सवर्ण समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस अधिसूचना को “काला कानून” बताते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान चौराहे पर “काला कानून वापस लो”, “समानता के अधिकार से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लिखे बैनर और पोस्टर हाथों में लिए गए थे। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर एवं काला टीका लगाकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में निहित समानता के अधिकार के विरुद्ध है तथा यह सामान्य वर्ग के छात्रों और नागरिकों के हितों की अनदेखी करती है।
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मुंडन कराकर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मण समाज के निर्मल कांत शुक्ला एवं हरिओम वाजपेई ने मुंडन कराकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना रोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे अपने त्याग और विरोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि जब तक यह काला कानून वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस्तीफे के मुद्दे ने पकड़ा जोर
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इस दौरान बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से जुड़े मामले को भी उठाया गया, जिससे UGC नियमों को वापस लेने की मांग को और अधिक बल मिला। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह अधिसूचना शैक्षणिक संस्थानों में भय और असंतोष का वातावरण पैदा कर रही है।
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अधिवक्ताओं का मिला समर्थन
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आंदोलन को स्थानीय अधिवक्ताओं का भी समर्थन मिला। वकीलों के एक समूह ने मौके पर पहुंचकर सवर्ण समाज की मांगों को न्यायसंगत बताया और कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
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भीड़ की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
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राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
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प्रदर्शन के समापन पर समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि UGC द्वारा लागू की गई यह अधिसूचना एकतरफा है और समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करती है। इसमें झूठी या फर्जी शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान न होने को गंभीर खामी बताते हुए इसके दुरुपयोग की आशंका जताई गई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि देश की लगभग 40 से 50 करोड़ सामान्य वर्ग की जनसंख्या के संवैधानिक अधिकारों का इस अधिसूचना के माध्यम से उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही मांग की गई कि सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित और संविधानसम्मत नीति बनाई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि UGC की यह अधिसूचना वापस नहीं ली गई, तो सवर्ण समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देगा।











